मुसाफिर है जिन्दगी | Ashish Raj Kiran | Official Author Website
नया हिंदी उपन्यास (2026)

विरह के पार

लेखक: आशीष राज किरन | शब्द चित्र प्रकाशन
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मुसाफिर है जिन्दगी


मुसाफिर है जिन्दगी ,
रूकती नहीं किसी मोड़ पे
दो पल जिन्दगी के,
आओ जी ले खुशी से |

किसकी किस्मत में क्या है
किसको पता,
किस्मत से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |

डर का कमरा
हर किसी के दिल में है,
उस डर से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |

राह चलते हुए,
लग सकती है चोट,
पर उस चोट से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |

हर किसी को एक दिन
बिछुड़ना है सबसे,
पर बिछुड़ने से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |

कभी भी हो सकती है
बरसात आशुओं की,
उस बरसात से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |

मोहब्बत का अंजाम
अक्सर होता है बुरा,
उस अंजाम से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |

" आशीष " मिलते है कम
बद्दुवाओ के बदले,
उन बद्दुवाओ से पहले
आओ जी ले ख़ुशी से |
- Ashish Kr. Rawat

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